Thursday, 8 August 2013

एक सपना जो सच हुआ

मई में 15 तारीख के बाद हमारे यूनिवर्सिटी परीक्षाओं का समय आ ही जाता है।  हमारी भी परीक्षाएं उसी समय आरम्भ हुई थी।  इन्ही सबके बीच मुझे देना था उस विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा जो मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं थी।  खैर, पेपर दिया,वापस आकर काफी कुछ समय बीता,अपने पुराने दोस्तों की बिछडन का ढेर सारा दुःख लेकर घर गए।  आने वाले समय में क्या करना है,ये विचारों की चर्चा में प्रमुख विषय रहता था, ज़िन्दगी उस मोड़ पर थी जहाँ मैंने अपने लिए वाकई कोई विकल्प नहीं  रखा था।  UPSC में जाना ही एकमात्र सपना था जो,जानता था मैं,की इतनी जल्दी पूरा नहीं होने वाला है, प्राइवेट नौकरी ना मै कभी कर पता और ना ही कभी इस और कोशिश की।  तो फिर अब और क्या??, इसी उधेड़बुन में दिल्ली चला आया की शायद विकल्पों के ढेर में मुझे अपने लिए भी कुछ मिल ही जाएगा,मगर ये फैसला ज़िन्दगी का सबसे नकारात्मक फैसला बनता जा रहा था मेरे लिए।  यहाँ के लोग,यहाँ का समाज,इतना एकाकी,आस-पड़ोस का अपने पड़ोसियों से व्यव्हार जैसी चीज का अभाव,ये सब मुझे एक बार फिर व्याकुल कर रहा था।  मैं वापस जाना चाहता था, वहीं जहाँ से कभी कोई सफ़र शुरु किया था, अपने मम्मी-पापा के पास,जाने क्यूँ मगर अब मुझे घर जैसे बुला रहा था।  मैं घर गया,सोचा शायद कुछ दिनों का अपनों का साथ मुझे हौसला देगा,अपनी लड़ाई लड़ने को,उसे जीतने की,मगर वहां पहुंचकर एक निष्कर्ष निकाला- मैं अब दिल्ली नहीं रहूँगा,योजनायें बदल गयीं,विचार बदल गए ,हालांकि लक्ष्य वही था अभी तक। 

                                 इन तमाम समयाचाक्रों में कभी भी JNU में,अपने चयन को लेकर नहीं सोचा। कैसे सोचता?,जिस पेपर में देश भर से ग्रेजुएट अपने विषय को पढ़कर उस आधार पर प्रवेश परीक्षा देते हैं,उसमे कोई Non-Humanities Background का छात्र कैसे इतनी आसानी से जा सकता है,वो भी केवल एक NCERT की किताब पढ़कर, बस थोडा बहुत जो भरोसा था,वो अपनी लेखनी और अपने सामजिक विचारों का, मगर ये सब यकीन दिलाएं,ऐसा कुछ भी नहीं था। 
            19 की दोपहर के 12 बजे का समय,  ट्रेन में था मैं,अपना इअरफोन लगाकर गाना सुन रहा था,तभी एक मैसेज आया, मैंने बटने दबायीं और मैसेज खुला- 
Congratulation, You have been selected in JNU Entrance Examination 2013-14. 
खुशियों का ज्वार जैसे दूर समुन्दर में मुझे अपनी ओर आता दिखा।  और फिर, मैं ना जाने कितना खुश हुआ,बस जल्दी से घर पहुचने की देर, इन खुशियों को बाँटने की जल्द,और अपने अन्दर के ज्वार को फूट पाने से रोकने की जल्द, बस ऐसे ही एहसासों में चले जा रहा था,चले जा रहा था।  
जाने कितने अरसों बाद एक मौका आया था, मम्मी-पापा को कुछ खुशियाँ देने का, वर्ना पढाई लिखाई के मामले में हिन्दुस्तान के करोड़ों बच्चों की तरह मैंने भी डांट ही खायी है। मगर आज तो समाचार कुछ और ही था,उम्मीदों से परे,सबसे अलग,मैंने अपने लिए नयी राह चुनी और मुझे फक्र है खुद पर और विश्वास है अपने भगवान् पर जो मुझे इतनी बड़ी यूनिवर्सिटी में मौका मिला पढने का,सीखने का,और एक नयी दुनिया में जीने का.……. 

JNU में सफ़र की शुरुवात हो गयी,उम्मीद करता हूँ,यहाँ के तमाम संसाधनों का प्रयोग कर एक नयी इबारत लिखूंगा,


मेरे साथ बिताये पलों का आखिर क्या हिसाब करोगे?,
मुझ जैसा दोस्त पाने की खुदा से फ़रियाद करोगे,
मैं रहूँ या ना रहूँ तुम्हारे बीच कभी,
कुछ ऐसा कर जाऊँगा की ताउम्र याद करोगे। 

2 comments:

  1. All the best nayi shuruaat ke liye :-)

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    1. Thank u bhaiyaaaaaa, thank u soooooooo mch...

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